कच्चे तेल की कीमतों में अचानक गिरावट, लेकिन खतरा बरकरार! एक चूक बढ़ा सकती है दुनिया की मुश्किलें

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर करवट ली है। पिछले दिनों 117 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचा ब्रेंट क्रूड अब गिरकर करीब 110 डॉलर पर आ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद से बाजार को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन क्या यह गिरावट लंबे समय तक टिकेगी?
मध्य पूर्व में जारी युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर संकट के कारण तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी है।
आज क्या है कच्चे तेल का भाव?
सोमवार, 2 नवंबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड करीब 3 फीसदी टूटकर 110 डॉलर प्रति बैरल (Crude Oil Price Today 2 November 2026) के आसपास पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत भी करीब 3 फीसदी गिरकर 101 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई।
मनीकंट्रोल की सुबह की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड करीब 110 डॉलर और WTI करीब 100.9 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं, रॉयटर्स की रिपोर्ट में शुरुआती कारोबार के दौरान ब्रेंट की कीमत 109.75 डॉलर और WTI की कीमत 100.69 डॉलर दर्ज की गई। यह गिरावट पिछले सप्ताह आई तेजी के बाद देखने को मिली है।
अक्टूबर के आखिरी कारोबारी दिनों में ब्रेंट क्रूड छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया था। उस समय बाजार में आशंका थी कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ सकता है। कीमतों में आई ताजा गिरावट को अभी तेल संकट का अंत नहीं माना जा सकता। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव लगातार बदलते रहते हैं।
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अचानक क्यों सस्ता हुआ तेल?
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए कतर के अधिकारी मध्यस्थता कर रहे हैं। 2 नवंबर तक ईरान और कतर के अधिकारियों के बीच लगातार तीसरे दिन बातचीत जारी रही।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि,
उनका देश रक्षा और कूटनीति, दोनों के लिए तैयार है। ईरान की ओर से बातचीत को आगे बढ़ाने के संकेत मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति को लेकर बनी कुछ चिंताएं कम हुई हैं।
दरअसल, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता है, तो निवेशकों को डर रहता है कि मध्य पूर्व से होने वाली तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसका असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर पड़ता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बातचीत को सकारात्मक बताया है। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच अभी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है। ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने का प्रस्ताव भी बातचीत का अहम हिस्सा है। इसके लिए ईरान ने अमेरिका के सामने कुछ शर्तें रखी हैं।
होर्मुज संकट से फिर बढ़ सकती हैं तेल की कीमतें
भले ही सोमवार को तेल की कीमतों में गिरावट आई हो, लेकिन आने वाले दिनों में फिर तेजी आने का खतरा बना हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर संकट है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों का परिवहन होता है।
हाल के दिनों में इस क्षेत्र में टैंकरों पर हमलों और जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 1 नवंबर को इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही काफी धीमी रही। वहीं, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि दो तेल टैंकर समुद्री बारूदी सुरंगों से टकराने के बाद विस्फोट का शिकार हुए। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी तरफ, ओपेक प्लस के सात प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने दिसंबर 2026 के लिए उत्पादन लक्ष्य में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। इन देशों में सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान शामिल हैं। युद्ध के कारण कई उत्पादक देश अपने निर्धारित उत्पादन लक्ष्य से कम तेल का उत्पादन कर रहे हैं।
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120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है क्रूड का भाव
अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान को लेकर ट्रंप प्रशासन का अगला कदम भी बाजार के लिए अहम होगा। ट्रंप ने चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करने की बात कही है, लेकिन इसके बाद सैन्य कार्रवाई की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है।
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, अगर बातचीत विफल होती है और समुद्री रास्तों पर हमले बढ़ते हैं, तो ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। दूसरी तरफ, अगर दोनों देशों के बीच समझौता होता है और तेल की आपूर्ति सामान्य होती है, तो कीमतों में और गिरावट भी संभव है।
फिलहाल कच्चे तेल का बाजार दो स्थितियों के बीच फंसा हुआ है। एक तरफ शांति वार्ता से कीमतों को राहत मिल रही है, तो दूसरी तरफ युद्ध और सप्लाई बाधित होने का खतरा बना हुआ है। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के फैसले ही तय करेंगे कि कच्चा तेल सस्ता होगा या फिर एक बार फिर महंगाई की नई लहर देखने को मिलेगी।

