इस्लामाबाद में वार्ता के बीच चीन पर बड़ा आरोप, क्या ईरान को मिल रहा है खतरनाक हथियार सपोर्ट?

इस्लामाबाद में वार्ता के बीच चीन पर बड़ा आरोप, क्या ईरान को मिल रहा है खतरनाक हथियार सपोर्ट?

दुनिया की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आता दिख रहा है। अमेरिका की खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ईरान को आधुनिक एयर डिफेंस हथियार भेजने की तैयारी कर रहा है। यह खुलासा ऐसे समय पर हुआ है जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर अहम बातचीत चल रही है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह कदम मध्य पूर्व में शांति की कोशिशों को कमजोर कर सकता है

चीन पर ईरान को हथियार भेजने के आरोप से बढ़ा तनाव

अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ईरान को कंधे से चलने वाली एंटी-एयर मिसाइल प्रणाली यानी मैनपैड्स (MANPADS) देने की तैयारी (China Iran Weapons Shipment) कर रहा है। ये छोटे लेकिन बेहद खतरनाक हथियार होते हैं, जो कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों को आसानी से गिरा सकते हैं।

बताया जा रहा है कि हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच चले पांच हफ्ते के संघर्ष में भी इसी तरह के हथियारों ने अहम भूमिका निभाई थी। अगर ईरान को ये सिस्टम मिल जाता है, तो उसकी एयर डिफेंस काफी मजबूत हो सकती है और उसकी सैन्य ताकत बढ़ सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन इन्हें सीधे देने के बजाय तीसरे देशों के जरिए भेज सकता है ताकि असली स्रोत छिपा रहे।

वहीं चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें गलत और बेबुनियाद बताया है, जिससे इस मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और ज्यादा बहस शुरू हो गई है।

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इस्लामाबाद में सीजफायर पर हाई लेवल बातचीत

पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बड़ी शांति वार्ता चल रही है, जो हाल ही में पाकिस्तान की मध्यस्थता से लागू हुए दो हफ्ते के अस्थायी सीजफायर के बाद हो रही है। इस अहम बातचीत में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जबकि उनके साथ मध्य पूर्व के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुश्नर भी मौजूद हैं।

दूसरी तरफ ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर ग़ालीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची बातचीत में शामिल हैं। पाकिस्तान सरकार ने इस बातचीत को “करो या मरो” जैसी बेहद गंभीर स्थिति बताया है, जहां परमाणु मुद्दे, प्रतिबंधों में राहत, होर्मुज जलडमरूमध्य और लेबनान जैसे कई बड़े क्षेत्रीय विवादों पर चर्चा हो रही है।

बता दें कि इस वार्ता को लेकर इस्लामाबाद में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं और शहर में सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया गया है, जिससे साफ है कि पूरी दुनिया की नजर इस बातचीत के नतीजों पर टिकी हुई है।

ईरान-चीन-अमेरिका विवाद से फिर बिगड़ सकते हैं हालात

इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चिंता पैदा कर दी है। अगर चीन की तरफ से ईरान को नई सैन्य मदद मिलती है, तो इससे पहले से चल रहे सीजफायर समझौते पर खतरा पैदा हो सकता है और इलाके में फिर से संघर्ष भड़कने की आशंका बढ़ सकती है। अमेरिका पहले ही साफ कर चुका है कि जो भी देश ईरान को हथियार देगा, उस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मामले में सख्त रुख अपनाए हुए हैं और उनकी जल्द ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात भी तय मानी जा रही है। बता दें कि ईरान अपनी कुछ शर्तों पर अड़ा हुआ है, जिसमें लेबनान से जुड़े मुद्दे और कतर में जमी हुई संपत्तियों की वापसी शामिल है, जबकि अमेरिका चाहता है कि बातचीत का कोई ठोस और जल्दी नतीजा निकले।

हालांकि, जानकारों का मानना है कि अगर यह हथियार विवाद और बढ़ता है तो अमेरिका और चीन के रिश्तों में भी तनाव गहरा सकता है, जो पहले से ही व्यापार और रणनीतिक मुद्दों को लेकर दबाव में हैं।

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