भारत-चीन सीमा पर फिर हुई बड़ी बातचीत, LAC से नदी डेटा तक कई अहम मुद्दों पर बनी सहमति

India-China Border Talk 2026
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India-China Border Talk: भारत और चीन के बीच एक बार फिर सीमा से जुड़े अहम मुद्दों पर उच्च स्तरीय बैठक हुई है। नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में सिर्फ LAC की स्थिति पर ही नहीं, बल्कि सीमा पार बहने वाली नदियों के डेटा साझा करने और सीमा पर शांति बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब दोनों देश पिछले कुछ महीनों से अपने संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं।

भारत-चीन के बीच किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

नई दिल्ली में गुरुवार को भारत और चीन के बीच वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) की 36वीं बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में भारत की ओर से संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) सुजीत घोष ने प्रतिनिधित्व किया, जबकि चीन के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सीमा और समुद्री मामलों के विभाग की महानिदेशक होउ यानकी ने किया।

बैठक के दौरान अरुणाचल प्रदेश से जुड़े वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि सीमा पर किसी भी तरह की गलतफहमी या तनाव से बचने के लिए पहले से मौजूद राजनयिक और सैन्य संवाद तंत्र का लगातार इस्तेमाल किया जाएगा।

इसके तहत WMCC, स्थानीय कमांडर स्तर की बैठकें और दोनों देशों के बीच पहले से तय अन्य संवाद माध्यम सक्रिय रखे जाएंगे। बातचीत में भारत-चीन सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों की 24वीं बैठक में हुई चर्चाओं की भी समीक्षा की गई।

भारत ने नदी डेटा शेयरिंग का मुद्दा क्यों उठाया?

बैठक में सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन, संस्थागत सहयोग और सीमा पार सहयोग जैसे विषयों पर भी दोनों देशों ने अपने विचार साझा किए। भारत ने इस दौरान सीमा पार बहने वाली नदियों से जुड़े विशेषज्ञ स्तर के तंत्र (Expert Level Mechanism) की जल्द बैठक बुलाने की मांग दोहराई। भारत ने यह भी कहा कि,

चीन को अपने ऊपरी इलाकों में चल रही परियोजनाओं से संबंधित तकनीकी जानकारी समय पर साझा करनी चाहिए।

भारत ने यह मुद्दा इसलिए उठाया क्योंकि सीमा पार बहने वाली नदियों का सीधा संबंध देश की जल सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। चीन में बनने वाली परियोजनाओं का असर नीचे की ओर बहने वाले जल प्रवाह पर पड़ सकता है, इसलिए समय पर तकनीकी जानकारी साझा करना दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अहम माना जाता है।

बैठक में दोनों देशों ने एक बार फिर दोहराया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना भारत-चीन संबंधों के बेहतर भविष्य के लिए जरूरी है।

गलवान के बाद कैसे बदले भारत-चीन संबंध?

साल 2020 में गलवान घाटी की घटना और पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक चले सैन्य गतिरोध के बाद भारत और चीन के संबंधों में गहरा तनाव देखने को मिला था। इस घटना ने दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी को और बढ़ा दिया और सीमा पर स्थिति काफी संवेदनशील हो गई थी।

हालांकि, पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत में धीरे-धीरे तेजी आई है। इसी क्रम में नई दिल्ली में हुई 36वीं WMCC बैठक को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसमें सीमा से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

इससे पहले 28 जुलाई को भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने दो दिवसीय चीन दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने चीनी अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय संबंधों और सीमा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की थी।

इसके अलावा 21 जुलाई को मनीला में आसियान से जुड़े कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी की मुलाकात भी हुई थी। इस बैठक में जयशंकर ने स्पष्ट कहा था कि,

भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सबसे जरूरी शर्त है। दोनों देशों के रिश्ते आपसी सम्मान, साझा हित और संवेदनशीलता के आधार पर आगे बढ़ने चाहिए।

लगातार सैन्य और कूटनीतिक वार्ताओं के बाद स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला है। अक्टूबर 2024 में दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख के डेपसांग और डेमचोक जैसे अंतिम प्रमुख विवाद वाले क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी पर सहमति बनाई थी।

इसके बाद भारत और चीन ने संबंधों को सामान्य करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं, जिनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली, वीजा सेवाओं की दोबारा शुरुआत और सीधी उड़ानों को फिर से शुरू करने की दिशा में प्रयास शामिल हैं।

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