नेपाल बाढ़ के 21 दिन बाद भी तबाही का मंजर! 1,399 मौतें, 5 हजार से ज्यादा लापता

नेपाल में आई भीषण बाढ़ को अब 21 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन तबाही का मंजर अभी भी साफ नहीं हुआ है। मरने वालों का आंकड़ा अब 1,399 तक पहुंच गया है, जबकि 5 हजार से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
कब और कैसे आई तबाही?
यह आपदा 26 अगस्त 2026 को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई थी। पहाड़ों में अचानक आई भीषण बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते सैकड़ों घर, सड़कें और पुल बाढ़ के तेज बहाव में बह गए।
सबसे ज्यादा तबाही चितवन, नुवाकोट, रसुवा, गोरखा, धादिंग, तनहूं और पूर्वी-पश्चिमी नवलपरासी जिलों में देखने को मिली। इन इलाकों में मलबे और कीचड़ के नीचे से अब भी लगातार शव बरामद हो रहे हैं, जिससे मरने वालों की संख्या हर दिन बढ़ती जा रही है।
21 दिन बाद भी हालात कैसे हैं?
अधिकारियों के मुताबिक, हाल ही में और शव बरामद होने के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,399 (Nepal Flood Death Toll 1399) हो गई है। इनमें रसुवा से 189, गोरखा से 78, धादिंग से 72 और तनहूं से 38 शव शामिल हैं। इसके अलावा काठमांडू के अस्पतालों में इलाज के दौरान भी कुछ और बाढ़ पीड़ितों की जान चली गई।
सबसे चिंता की बात यह है कि तीन हफ्ते बीत जाने के बाद भी करीब 5,170 लोगों का कोई पता नहीं चल पाया है। इनमें से कई परिवार अब भी अपनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं, जबकि उम्मीद हर दिन धुंधली होती जा रही है। कई बरामद शवों की पहचान करने के लिए DNA सैंपल तक लिए जा रहे हैं, ताकि परिवारों को उनके अपनों के बारे में सही जानकारी दी जा सके।
राहत और बचाव कार्य में अब तक क्या हुआ?
राहत की बात यह है कि सुरक्षा बलों की संयुक्त टीमों ने अब तक कुल 13,742 लोगों को सुरक्षित बचा लिया है। नेपाल की सेना और स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ पड़ोसी देश भारत भी मदद के लिए आगे आया है। भारतीय सुरंग बचाव विशेषज्ञों की एक टीम ने नेपाल सेना के साथ मिलकर रसुवा जिले की चिलिमे सुरंग के अंदर एक अस्थायी रास्ता तैयार किया, जिससे भारी मशीनें और राहत सामग्री मुश्किल इलाकों तक पहुंचाई जा सकीं।
भारत की तरफ से कई खेप में राहत सामग्री भी नेपाल भेजी गई है, ताकि प्रभावित लोगों को खाना, दवाइयां और जरूरी सामान समय पर मिल सके। हालांकि अभी भी पहाड़ी इलाकों में मलबा हटाने और लापता लोगों की तलाश का काम बड़ी चुनौती बना हुआ है, क्योंकि कई जगह रास्ते पूरी तरह टूट चुके हैं।
अधिकारियों का कहना है कि जब तक आखिरी लापता व्यक्ति की तलाश पूरी नहीं हो जाती, तब तक बचाव अभियान इसी तरह जारी रहेगा। यह हादसा हिमालयी क्षेत्र में अचानक आने वाली बाढ़ के खतरे की गंभीरता को एक बार फिर सामने लाता है और आने वाले समय में बेहतर चेतावनी व्यवस्था की जरूरत को भी रेखांकित करता है।

