वैभव सूर्यवंशी की सफलता के पीछे छिपी है पिता की सख्ती, 15 साल की उम्र में टीम इंडिया तक पहुंचने की अनोखी कहानी

Vaibhav Suryavanshi Team India selection Success Story
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महज 15 साल की उम्र में बिहार के वैभव सूर्यवंशी ने वह कर दिखाया है, जिसका सपना लाखों युवा क्रिकेटर देखते हैं। IPL 2026 में अपने धमाकेदार प्रदर्शन के बाद अब उन्हें भारतीय टी20 टीम के स्क्वॉड में जगह मिली है। लेकिन इस सफलता के पीछे सिर्फ चौके-छक्के नहीं, बल्कि वर्षों का संघर्ष, परिवार का त्याग और पिता की सख्ती भी छिपी है। जानिए बिहार के इस युवा बल्लेबाज की प्रेरक कहानी, जो अब इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ा है।

बचपन से क्रिकेट ही था वैभव सूर्यवंशी का सबसे बड़ा सपना

वैभव सूर्यवंशी की सफलता किसी एक दिन की मेहनत का नतीजा नहीं है। उनके पिता संजीव सूर्यवंशी बताते हैं कि वैभव ने बहुत छोटी उम्र में ही तय कर लिया था कि उसे क्रिकेट में ही अपना भविष्य बनाना है। यही वजह रही कि बचपन से उसका पूरा ध्यान अभ्यास और खेल को बेहतर बनाने पर रहा। परिवार ने भी हर कदम पर उसका साथ दिया और उसे आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रेरित किया।

वर्षों की मेहनत, लगन और समर्पण का ही परिणाम है कि आज वह भारतीय टीम के करीब पहुंच चुका है। वैभव की इस उपलब्धि पर सिर्फ उनका परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा बिहार गर्व महसूस कर रहा है, जबकि देशभर से मिल रहा प्यार और समर्थन उनके हौसले को नई उड़ान दे रहा है।

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बल्ला हाथ में आते ही दिखने लगी थी खास प्रतिभा

वैभव सूर्यवंशी की क्रिकेट प्रतिभा की झलक उनके परिवार को बचपन में ही दिखाई देने लगी थी। पिता संजीव सूर्यवंशी बताते हैं कि जब वैभव ने पहली बार बल्ला थामा, तभी उसके खेलने का अंदाज बाकी बच्चों से अलग नजर आया। समय के साथ उसे बेहतर अभ्यास और प्रशिक्षण का मौका मिला तो उसके खेल में लगातार सुधार होता गया।

हर दिन बढ़ते आत्मविश्वास और मेहनत को देखकर परिवार को यकीन होने लगा था कि अगर सही दिशा मिलती रही तो वैभव एक दिन क्रिकेट की दुनिया में बड़ा नाम जरूर बनाएगा।

पिता की डांट और अनुशासन ने निभाई बड़ी भूमिका

वैभव सूर्यवंशी के टीम इंडिया तक पहुंचने के सफर (Vaibhav Suryavanshi Team India Selection) में सिर्फ उनकी बल्लेबाजी ही नहीं, बल्कि पिता संजीव सूर्यवंशी का अनुशासन भी अहम रहा है। बेटे की सफलता पर बात करते हुए संजीव ने बताया कि,

वैभव को बचपन से ही मेहनत और समय की कीमत समझाई गई। अभ्यास में कोई लापरवाही होने पर उन्हें डांट भी पड़ती थी, लेकिन उसका मकसद केवल बेहतर खिलाड़ी बनाना था।

उनका मानना है कि क्रिकेट में आगे बढ़ने के लिए प्रतिभा के साथ अनुशासन भी जरूरी होता है। वर्षों की मेहनत, परिवार के त्याग और पिता की सख्ती का ही नतीजा है कि आज बिहार का यह युवा खिलाड़ी भारतीय टीम के दरवाजे तक पहुंच चुका है और पूरे देश की उम्मीदें उससे जुड़ गई हैं।

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वैभव सूर्यवंशी के सामने अब इतिहास रचने का मौका

आईपीएल में धमाकेदार प्रदर्शन के बाद वैभव सूर्यवंशी की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि जब वह कुछ दिनों के लिए अपने घर पहुंचे तो उनसे मिलने और एक झलक पाने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। परिवार के लिए लोगों की इस उत्सुकता को संभालना भी आसान नहीं रहा।

वहीं वैभव की दादी ने उनकी सफलता का श्रेय पिता संजीव सूर्यवंशी के वर्षों के संघर्ष और समर्पण को दिया। उन्होंने भावुक होकर कहा कि,

जो सपना कभी उनके बेटे का अधूरा रह गया था, उसे अब उनका पोता पूरा करने की राह पर बढ़ चुका है।

अब सभी की निगाहें वैभव के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि 9 से 21 जून तक वह श्रीलंका में इंडिया-ए की ओर से त्रिकोणीय श्रृंखला खेलेंगे। इसके बाद आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे में मौका मिलने पर वह 16 साल की उम्र से पहले भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले पहले पुरुष खिलाड़ी बनकर इतिहास रच सकते हैं।

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