गंगा एक्सप्रेसवे पर बारिश का कहर! ₹36,000 करोड़ की सड़क पर बना 10 मीटर गहरा गड्ढा, नाले भी क्षतिग्रस्त

36,000 crore worth Ganga Expressway Damages, develops 10-metre crater after heavy rain
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Ganga Expressway Damage: उत्तर प्रदेश के उन्नाव में हाल ही में शुरू हुए गंगा एक्सप्रेसवे पर भारी बारिश के बाद सड़क के एक हिस्से में धंसाव और मिट्टी के कटाव की समस्या सामने आई है। सड़क किनारे की मिट्टी बहने के बाद अधिकारियों ने मौके पर जांच शुरू कर दी है और प्रभावित हिस्से में मरम्मत का काम चल रहा है। इस घटना ने एक्सप्रेसवे की ड्रेनेज व्यवस्था और निर्माण की मजबूती को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सराय कटियां नहर पुल के पास दिखी सड़क में खराबी

उन्नाव में प्रभावित हिस्सा एक्सप्रेसवे के 421 से 422 किलोमीटर के बीच बताया जा रहा है। यह स्थान दही चौकी क्षेत्र के बशीरतगंज के पास सराय कटियां नहर पुल के नजदीक है। स्थानीय लोगों की नजर सबसे पहले सड़क के आसपास हुए नुकसान पर पड़ी, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई।

सूचना मिलने के बाद एक्सप्रेसवे के इस हिस्से की जिम्मेदारी संभालने वाली एजेंसी की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। फिलहाल मरम्मत का काम किया जा रहा है। प्रभावित हिस्से में एक्सपेंशन ज्वाइंट के आसपास काम के साथ सड़क की ऊपरी सतह को भी दोबारा ठीक किया जा रहा है।

जांच के दौरान अधिकारियों को सड़क के किनारे बने कुछ ड्रेनेज चैनल भी क्षतिग्रस्त मिले। इन नालियों की मरम्मत भी शुरू कर दी गई है। हालांकि अभी यह साफ नहीं हुआ है कि ड्रेनेज सिस्टम की खराबी ने मिट्टी के कटाव को कितना बढ़ाया।

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अमरोहा में भी बारिश के बाद सड़क पर बनी परेशानी

उन्नाव की घटना के बीच अमरोहा से भी गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) पर बारिश से जुड़ी एक और समस्या सामने आई। हसनपुर तहसील में फैयाजनगर और सहदरा मिलक गांवों के बीच एक्सप्रेसवे के एक हिस्से में भारी बारिश के बाद सड़क पर धंसाव और गड्ढे जैसी स्थिति बनने की जानकारी सामने आई है।

एक ही समय में एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में बारिश से जुड़ी समस्याएं सामने आने के बाद इस बड़े प्रोजेक्ट की जल निकासी व्यवस्था पर ध्यान गया है। खासकर मानसून के दौरान सड़क के किनारे की मिट्टी और ऊंचे हिस्सों से पानी की निकासी किस तरह होती है, यह जांच का अहम विषय बन गया है।

गंगा एक्सप्रेसवे की लंबाई 594 किलोमीटर है। यह छह लेन वाला एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है और उत्तर प्रदेश के 12 जिलों से होकर गुजरता है। इसका उद्देश्य दोनों शहरों के बीच सफर को काफी कम करना है। एक्सप्रेसवे के जरिए मेरठ से प्रयागराज की यात्रा करीब 12 घंटे से घटकर लगभग छह घंटे होने की उम्मीद है।

उन्नाव में पहले भी बारिश से हुआ था नुकसान

उन्नाव वाला हिस्सा बारिश से प्रभावित होने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले जुलाई में भारी बारिश के बाद एक्सप्रेसवे से सोनिक टोल प्लाजा को जोड़ने वाली करीब सात मीटर लंबी एप्रोच रोड को नुकसान पहुंचा था। तेज बारिश के कारण सड़क के किनारे बने एम्बैंकमेंट की मिट्टी बह गई थी और बाद में सड़क का एक हिस्सा भी टूट गया था।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के कारण एक्सप्रेसवे के निर्माण और पानी की निकासी की व्यवस्था पर फिर से सवाल उठने लगे हैं। हालांकि अभी किसी निर्माण संबंधी कमी को इस नुकसान का कारण नहीं माना गया है। अधिकारियों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी UPEIDA के अधिकारी प्रभावित स्थान पर पहुंच चुके हैं और मरम्मत का काम जारी है। फिलहाल भारी बारिश से हुई मिट्टी की कटाई को तत्काल कारण माना जा रहा है, लेकिन यह पता लगाना बाकी है कि खराब ड्रेनेज या किसी अन्य तकनीकी कमी ने नुकसान को बढ़ाने में भूमिका निभाई या नहीं।

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उन्नाव पैकेज का निर्माण और रखरखाव एक निजी ठेकेदार के जिम्मे है। 594 किलोमीटर लंबे मेरठ-प्रयागराज गंगा एक्सप्रेसवे का औपचारिक उद्घाटन 29 अप्रैल 2026 को हुआ था। ऐसे में एक्सप्रेसवे के शुरुआती दौर में सामने आई बारिश संबंधी समस्याओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है, ताकि भविष्य में मानसून के दौरान ऐसी परेशानी दोबारा न हो।

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Veer Rai

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज

Veer Rai जय जगदम्बा न्यूज के Founder और Editor हैं। उन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है। वे बिहार और देश-दुनिया से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों के साथ करियर, शिक्षा, नौकरी, राजनीति, धर्म, बिजनेस, टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जैसे विषयों पर गहन और शोध-आधारित लेख प्रकाशित करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल, स्पष्ट और विश्वसनीय भाषा में उपयोगी, तथ्यपरक और प्रमाणित जानकारी पहुंचाना है, जिससे लोग सही और जागरूक निर्णय ले सकें।

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