Ganesh Ji Ki Aarti: जय गणेश देवा से लेकर सुखकर्ता दुखहर्ता तक, यहां पढ़ें लोकप्रिय गणपति आरती

Ganesh Ji Ki Aarti: जय गणेश देवा और सुखकर्ता दुखहर्ता आरती
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Ganesh Ji Ki Aarti: भगवान श्री गणेश की पूजा में आरती का विशेष महत्व माना जाता है। “जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा” आरती देशभर में श्रद्धा के साथ गाई जाती है। वहीं मराठी आरती “सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची” भी गणपति आराधना की लोकप्रिय आरतियों में शामिल है।

जय गणेश देवा आरती का पाठ

भगवान श्री गणेश की आरती

पूजा, अनुष्ठान या किसी नए काम की शुरुआत के दौरान भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है। गणेश जी को विघ्न दूर करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। उनकी आरती के दौरान भक्त श्रद्धा के साथ दीप जलाकर भगवान का ध्यान करते हैं।

यहां पढ़ें श्री गणेश जी की आरती:

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

एकदंत, दयावंत, चार भुजाधारी। माथे पर सिंदूर सोहे, मूषक की सवारी॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया।बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजै सेवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

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सुखकर्ता दुखहर्ता मराठी गणपति आरती

मराठी आरती सुखकर्ता दुखहर्ता

भगवान गणेश की मराठी आरती “सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची” भी काफी लोकप्रिय है। गणपति पूजा के दौरान इसे विशेष श्रद्धा के साथ गाया जाता है। आरती में भगवान गणेश के स्वरूप, उनके आभूषण और भक्तों के प्रति उनकी कृपा का वर्णन किया गया है।

सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची। नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची। सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची। कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ति। दर्शनमात्रे मन कामनापूर्ति॥ जय देव…

रत्नखचित फरा तूज गौरीकुमरा।चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा।हिरेजड़ित मुकुट शोभतो बरा। रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरिया॥ जय देव…

लंबोदर पीतांबर फणीवर बंधना। सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना। दास रामाचा वाट पाहे सदना। संकष्टी पावावें, निर्वाणी रक्षावे, जय देव जय देव जय मंगलमूर्ति। दर्शनमात्रे मन कामनापूर्ति॥ जय देव…

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पूजा में गणेश आरती का महत्व

श्री गणेश की आरती धार्मिक आयोजनों और पूजा-पाठ का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। गणपति पूजा के समय भक्त भगवान के सामने दीप प्रज्वलित करके आरती करते हैं और उनके स्वरूप का स्मरण करते हैं।

“जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा” हिंदी में सबसे अधिक प्रचलित गणेश आरतियों में से एक है। इसके साथ ही “सुखकर्ता दुखहर्ता” महाराष्ट्र सहित देश के कई हिस्सों में गणपति आराधना के दौरान गाई जाती है। दोनों आरतियां भगवान गणेश के प्रति भक्तों की श्रद्धा और भक्ति को व्यक्त करती हैं।

गणेश पूजा के अवसर पर श्रद्धालु इन आरतियों का पाठ कर सकते हैं। पूजा के बाद आरती और प्रसाद के साथ धार्मिक अनुष्ठान पूरा किया जाता है।

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