क्या भारत में आने वाला है गैस संकट? हर महीने 30 से ज्यादा LPG टैंकर की जरूरत!

India LPG Demand 2027: क्या भारत में आने वाला है गैस संकट? हर महीने 30 से ज्यादा LPG टैंकर की जरूरत!
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भारत में LPG गैस की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन क्या सप्लाई उतनी ही मजबूत है? ताजा आंकड़े एक चौंकाने वाली तस्वीर दिखा रहे हैं, जहां उत्पादन बढ़ने के बाद भी हर महीने भारी कमी बनी रह सकती है। बता दें कि आने वाले समय में देश को दर्जनों LPG टैंकर आयात करने पड़ सकते हैं, जिससे गैस सिलेंडर की उपलब्धता और कीमत दोनों पर असर पड़ने की आशंका है।

भारत में LPG की मांग क्यों बढ़ रही है?

भारत में पिछले दो दशकों में LPG की खपत में जबरदस्त उछाल आया है। साल 1998-99 में जहां मासिक खपत करीब 5.35 लाख टन थी, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 31.3 लाख टन से ज्यादा हो गई है। इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण घर-घर LPG सिलेंडर पहुंचाने की सरकारी योजनाएं और साफ ईंधन को बढ़ावा देना है।

खासकर उज्ज्वला जैसी योजनाओं ने ग्रामीण इलाकों में भी LPG का उपयोग तेजी से बढ़ाया है। हालांकि, उत्पादन इस रफ्तार से नहीं बढ़ पाया। उसी अवधि में घरेलू उत्पादन सिर्फ 3.6 लाख टन से बढ़कर करीब 12.8 लाख टन तक ही पहुंचा है। यानी मांग और उत्पादन के बीच का अंतर लगातार बढ़ता गया है।

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उत्पादन बढ़ने के बाद भी क्यों रहेगा गैप?

सरकार का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 तक LPG की मांग 29 लाख टन प्रति माह (India LPG Demand 2027) तक पहुंच सकती है। अगर उत्पादन में 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी भी हो जाती है, तब भी हर महीने करीब 14 लाख टन से ज्यादा की कमी बनी रहेगी। इसका मतलब है कि करीब 15.6 लाख टन LPG आयात करना पड़ेगा।

हालांकि, अगर उत्पादन 50 प्रतिशत तक भी बढ़ा दिया जाए, तब भी आयात 13.4 लाख टन से ज्यादा रहेगा। यानी साफ है कि भारत की LPG जरूरतें इतनी तेजी से बढ़ रही हैं कि केवल घरेलू उत्पादन से उन्हें पूरा करना संभव नहीं है। इसी वजह से हर महीने 29 से 34 LPG टैंकरों की जरूरत पड़ेगी, अगर एक टैंकर की क्षमता 46,000 टन मानी जाए।

आयात पर बढ़ती निर्भरता और जोखिम

भारत का LPG आयात मुख्य रूप से पश्चिम एशिया के देशों पर निर्भर है। 2024 में सबसे ज्यादा आपूर्ति UAE, कतर, सऊदी अरब और कुवैत से हुई। हालांकि, यह स्थिति जोखिम भरी भी हो सकती है। अगर इस क्षेत्र में किसी तरह का भू-राजनीतिक तनाव या सप्लाई में बाधा आती है, तो भारत में LPG की उपलब्धता पर सीधा असर पड़ सकता है।

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ऐसे में अब भारत को अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे अन्य देशों से भी आपूर्ति बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। उपभोक्ताओं के स्तर पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। खासकर शहरों में LPG सिलेंडर जल्दी खत्म हो रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, चंडीगढ़ और दिल्ली में एक सिलेंडर औसतन 19 से 21 दिन में खत्म हो जाता है, जबकि राष्ट्रीय औसत 30 दिन है।

सरकार ने शहरी इलाकों में 25 दिन और ग्रामीण इलाकों में 45 दिन के अंदर रिफिल की सीमा तय की है, ताकि सप्लाई बेहतर तरीके से मैनेज की जा सके। कुल मिलाकर, भारत के सामने चुनौती यह है कि बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उसे उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ आयात के नए विकल्प भी तलाशने होंगे।

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