अब नहीं होगी चिप की कमी, सरकार ला रही है ₹1.2 लाख करोड़ की नई योजना

India Semiconductor Mission 2.0: ₹1.2 Lakh Crore Plan to Boost Chip Manufacturing in India
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India Semiconductor Mission 2.0: भारत अब सेमीकंडक्टर की दुनिया में बड़ा दांव खेलने जा रहा है। सरकार ₹1.2 लाख करोड़ तक के निवेश के साथ नया सेमीकंडक्टर मिशन लॉन्च करने की तैयारी में है। बता दें कि इसका असर सिर्फ टेक सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और नौकरियों पर भी पड़ेगा। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इससे भारत सच में चिप निर्माण में आत्मनिर्भर बन पाएगा या नहीं।

क्या है India Semiconductor Mission 2.0?

भारत सरकार जल्द ही नया सेमीकंडक्टर मिशन (India Semiconductor Mission 2.0) लॉन्च करने की तैयारी में है और माना जा रहा है कि इसे मई तक पेश किया जा सकता है। इस बार सरकार करीब ₹1 लाख करोड़ से ₹1.2 लाख करोड़ तक का बड़ा निवेश करने की योजना बना रही है।

हालांकि, अभी इसकी अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय इस प्रस्ताव पर काम कर रहा है और वित्त मंत्रालय की हरी झंडी का इंतजार है।

बता दें कि पहले फेज में ₹76,000 करोड़ का बजट रखा गया था, ऐसे में इस बार रकम काफी ज्यादा है, जो साफ दिखाता है कि सरकार अब सेमीकंडक्टर सेक्टर को तेजी से आगे बढ़ाने के मूड में है।

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सिर्फ चिप नहीं, पूरी इंडस्ट्री को मजबूत करने की तैयारी

इस बार सरकार का फोकस सिर्फ चिप बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करने पर है। पहले जहां ध्यान केवल मैन्युफैक्चरिंग और डिजाइन पर था, अब इसमें मशीनें, कच्चा माल और जरूरी संसाधन भी शामिल किए जा रहे हैं। दरअसल, दुनियाभर में चल रहे तनाव की वजह से सप्लाई चेन पर असर पड़ा है, और भारत इसी कमजोरी को अपनी ताकत बनाना चाहता है।

यही वजह है कि गैस सप्लायर, स्पेशल केमिकल कंपनियां, MSME और दूसरे सहायक उद्योगों को भी इस मिशन का हिस्सा बनाया जा रहा है, ताकि छोटे और मध्यम कारोबारियों को भी इसका सीधा फायदा मिल सके।

विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर भारत में बढ़ेगा चिप इनोवेशन

सरकार के नए सेमीकंडक्टर मिशन का अहम हिस्सा बनने जा रहा DLI 2.0 यानी डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव योजना अब देश में इनोवेशन को नई रफ्तार दे सकती है। इस योजना के तहत विदेशी कंपनियों को भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर शोध और विकास करने की अनुमति मिलेगी, जिससे नई तकनीक तेजी से भारत में आ सकती है।

सरकार को उम्मीद है कि आने वाले समय में इससे करीब 50 डीप-टेक सेमीकंडक्टर डिजाइन कंपनियां खड़ी हो सकती हैं, जो देश के टेक सेक्टर को और मजबूत बनाएंगी। हालांकि, यह भी देखना जरूरी होगा कि विदेशी कंपनियों के साथ यह साझेदारी जमीन पर कितनी सफल रहती है और इसका असली फायदा भारतीय कंपनियों तक कितना पहुंच पाता है।

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2030 तक चिप्स में आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य

भारत अब सेमीकंडक्टर सेक्टर में खुद पर भरोसा बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार यह मिशन लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा है, जिसका सीधा मकसद विदेशों से आने वाले चिप्स पर निर्भरता कम करना है।

सरकार चाहती है कि साल 2030 तक देश अपनी जरूरत के करीब 75 प्रतिशत सेमीकंडक्टर खुद ही तैयार करे। यह लक्ष्य आसान नहीं है, लेकिन अगर योजना सही तरीके से जमीन पर उतरी तो भारत दुनिया के बड़े सेमीकंडक्टर बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।

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