नेपाल में तबाही के बाद 3,000 से ज्यादा लोग लापता, 734 मौतों की पुष्टि, फिर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा

Nepal Flood Disaster: नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। अधिकारियों के मुताबिक दोनों क्षेत्रों में मृतकों की संख्या 734 पहुंच गई है, जबकि 3,000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में तलाश अभियान चला रहे हैं।
नेपाल-तिब्बत में बाढ़ से भारी तबाही
नेपाल-चीन सीमा के पास बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। बाढ़ का पानी तिब्बत की तरफ से आया और नेपाल में प्रवेश करने के बाद भोटे कोशी नदी में तेज बहाव के साथ फैल गया। इससे रसुवा और धादिंग के साथ-साथ राजधानी काठमांडू के दक्षिण-पश्चिम में स्थित नुवाकोट भी प्रभावित हुआ।
AFP की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल और तिब्बत में लापता लोगों की संख्या 3,000 से अधिक हो गई है और अब तक कम से कम 750 शव बरामद किए जा चुके हैं। नेपाल में 2,498 लोग अब भी संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। चीन के सरकारी प्रसारक CCTV के अनुसार तिब्बत में 16 लोगों की मौत हुई है और 546 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें 261 विदेशी नागरिक बताए गए हैं।
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फिर बढ़ा बाढ़ का खतरा
बाढ़ से प्रभावित इलाकों में खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। रविवार को नेपाली अधिकारियों ने भोटे कोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी। स्थानीय लोगों के मोबाइल फोन पर सुबह से ही बाढ़ को लेकर चेतावनी संदेश भेजे गए।
इस बीच बचावकर्मी काठमांडू को बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक से जोड़ने वाले प्रमुख राजमार्ग को साफ करने में जुटे रहे। लगातार बारिश और नदी का बढ़ता जलस्तर राहत कार्यों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। सबसे बड़ी चिंता हाइड्रोपावर परियोजनाओं में फंसे लोगों को लेकर है। माना जा रहा है कि कई सुरंगों के अंदर 100 से ज्यादा कर्मचारी फंसे हुए हैं।
गृह मंत्री सुदान गुरूंग के अनुसार, शनिवार देर रात नेपाली सेना ने त्रिशूली 3A जलविद्युत परियोजना की एक सुरंग में पाइप पहुंचाकर उसके अंदर हवा भेजने की कोशिश शुरू की थी। हालांकि रात में हुई बारिश और बढ़ते पानी के कारण बचाव अभियान को रोकना पड़ा। आपदा अधिकारियों ने बचाव दलों को सावधानी से काम करने की सलाह दी है।
राहत अभियान में जुटीं भारत और चीन की टीम
बाढ़ की तेज धारा अपने साथ बर्फ और मलबा लेकर आई, जिससे नदी किनारे मौजूद हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा। कुल 933 लोगों के हाइड्रोपावर परियोजनाओं के आसपास लापता होने की जानकारी सामने आई है। बचाव अभियान में नेपाल को भारत और चीन से भी मदद मिल रही है।
भारत ने विशेष बचाव अभियान का अनुभव रखने वाली 11 सदस्यों की टीम भेजी है। वहीं चीन ने सुरंगों में बचाव कार्य के विशेषज्ञों वाली 9 सदस्यीय टीम नेपाल भेजी है। इस आपदा के कारणों को लेकर भी जांच जारी है। नेपाल के विदेश मंत्री ने शनिवार को हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से बढ़ते खतरे पर चिंता जताई।
अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण यानी USGS के अनुसार बुधवार को नेपाल-चीन सीमा के पास हुई इस घटना के पीछे ग्लेशियर के टूटने की घटना हो सकती है। चीन की समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने विशेषज्ञों के हवाले से बताया कि नेपाल में लिरुंग चोटी की दक्षिणी ढलान पर एक ग्लेशियर टूट गया था, जिससे बर्फ और चट्टानों का बड़ा मलबा नीचे की ओर आया।
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93,000 से ज्यादा लोग प्रभावित
रेड क्रॉस के मुताबिक इस विनाशकारी बाढ़ से 93,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हो सकते हैं। नेपाल ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक मदद और विशेष बचाव उपकरणों की मांग की है। इसमें भारी वजन उठाने वाले ड्रोन, DNA जांच किट और शवों को सुरक्षित रखने के लिए बॉडी-फ्रीजर जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने नेपाल के लिए सहायता का ऐलान किया है। अमेरिका और कनाडा ने 3.6-3.6 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता देने की घोषणा की है। ब्रिटेन ने 6.8 मिलियन डॉलर की मदद का वादा किया है। संयुक्त राष्ट्र ने आपात सहायता के लिए 2.5 मिलियन डॉलर जारी किए हैं।
यूरोपीय संघ ने 2.3 मिलियन डॉलर और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज ने 1 मिलियन डॉलर से अधिक की सहायता देने की घोषणा की है। IFRC ने इसके साथ 31 मिलियन डॉलर की आपात अपील भी शुरू की है।

